यूपी चुनाव में निकलेगा पेगासस का जिन्न

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नई दिल्ली। केंद्र की सत्ता का सेमीफाइनल कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश चुनाव करीब आ चुका है। भाजपा सहित सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। चुनाव में पेगासस का जिन्न बाहर आने के कयास लगाए जाने लगे हैं। कहा जा रहा है कि जिस तरह सरकार ने पूर्व में विपक्ष के नेताओं की जासूसी कराई थी, ठीक वैसे ही यूपी चुनाव में भाजपा इसका उपयोग विपक्ष के नेताओं पर कर सकती है।

बता दें कि इसराइल की सर्विलांस कंपनी एनएसओ ग्रुप के सॉफ्टवेयर पेगासस का इस्तेमाल कर कई पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नेताओं, मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के फोन की जासूसी करने का दावा किया जा रहा है। सरकार इससे इंकार कर चुकी है और कह रही है कि उसने सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा, मगर अब तक इस सॉफ्टवेयर पर रोक न लगाना बता रहा है कि दाल में कुछ काला जरूर है, क्योंकि इजराइल के राजदूत ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पेगासस स्पाइवेयर केवल सरकार को बेचा गया था। ऐसा है तो, भारत के मामले में खरीदार, निश्चित रूप से भारत सरकार थी।

ऐन चुनाव से पहले आएगी रिपोर्ट
कहा जा रहा है कि यूपी चुनाव के कार्यक्रम दिसंबर में घोषित कर दिए जाएंगे। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस स्पाईवेयर मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है। इस समिति को 8 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सर्वोच्च अदालत में पेश करनी है। यह रिपोर्ट जनवरी में पेश की जाएगी, उस वक्त चुनावी तैयारियां चरम पर होंगी।

रिपोर्ट सरकार के पक्ष में रही तो कोई बात नहीं, मगर रिपोर्ट सरकार के खिलाफ आने पर पेगासस मामला योगी आदित्यनाथ और भाजपा को राजनीतिक चोट पहुंचा सकता है। यही वजह है कि सरकार और भाजपा फूंक-फूंककर कदम उठा रही है और इस सॉफ्टवेयर के जरिए अपनी चुनावी जमीन तैयार करने में लगी है, जिसका फायदा वह चुनाव में उठा सके।

विपक्ष बनाएगा मुद्दा
कहा यह भी जा रहा है कि सरकार यूी चुनाव तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को टालने की मांग कर सकती है। ऐसा इसलिए अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्र सरकार के खिलाफ आता है तो कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि दूसरे विपक्षी दल भी उसे यूपी चुनाव में जमकर भुनाएंगे। ऐसा फैसला, मुख्यमंत्री योगी और भाजपा को मुश्किल में डाल सकता है।

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