और इस तरह सरस्वती अपने घर चली गई…

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राजेंद्र श्रीवास्तव (नीरज), पत्रकार एवं समाजसेवी
झाबुआ।
मध्यप्रदेश का जनजातीय बाहुल्य जिला मुख्यालय। विगत करीब डेढ दो माह से इसी झाबुआ शहर में एक 25/27 वर्षीय मानसिक विक्षप्त महिला कंही से भटकते हुए आ गई ,जो नगर के बस स्टैंड ,विजय स्तम्भ, जिला अस्पताल जैसे क्षेत्रों में विचरण करती…कभी कोई कुछ खाने को दे देता तो कोई पीने को पेय दे देता …गुजर रही थी रोज की जिंदगी ,एक दिन मोड़ आया । नगर के कुछ सेवाभावी ने इसकी चिंता जाहिर की ,खबर मुझ तक दी गई ,मुझे एक और मिले प्रभु कार्य से प्रसन्नता थी,आतुर था जल्द सरस्वती से मिलकर जानना की कौन है कँहा से है क्यों भटक रही है… जा पंहुचा झाबुआ ।
जानकारी अनुसार बताये स्थान पँहुचा, सरस्वती के तन पर दो वस्त्र थे, हाथ मे गठरी जिसमे कई तरह के कपड़े भरे से दिखाई दे रहे थे , बस स्टेंड से मुख्य बाजार की और जाने वाली सड़क के बीचोबीच बनी छतरी के चबूतरे पर बैठी थी। में कुछ देर टकटकी लगाए देखता रहा ,इसी बीच हम दोनों की नजरें एक दूसरे को निहारती रही ,सरस्वती यकायक गुस्सेल स्वभाव प्रदर्शित करती हुई उस स्थान से उठ बस स्टैंड पर बने यात्री प्रतीक्षालय की और चल दी ,जैसा कि में चाहता ही था कि यह उचित स्थान की तरफ आ जाये तो में इससे बातें चर्चा कर जान पाऊँ , प्रभु की कृपा होना शुरू हो गई , सरस्वती प्रतीक्षालय की बेंच पर आ बैठी ,पास ही खाली जगह पर में जा बैठा, और तसल्ली से सामान्य चर्चा का दौर शुरू किया। बीच बीच मे पानी चाय चिप्स भी मांग अनुसार लाकर खिलाता रहा ,सारी बातों के ऑडियो रेकॉर्ड करता रहा। करीब दो घण्टे समय काल की बातचीत में कई उपयोगी सवालों के उत्तर अब मेरे पास रेकॉर्ड थे।
अब समय था लीगल प्रोसेस के माध्यम उक्त महिला के पुनर्वास की व्यवस्था करने का …सो इस केस की जानकारी देने वाले संवेदनशील जागरूक झाबुआ निवासी ,श्री प्रहलाद राठौर ,श्री कमलेश त्रिपाठी ,डॉ वैभव सुराणा ,दौलत गोलानी तथा झाबुआ बस स्टेंड असोसिएशन के सेवाभावी श्री सोनू भाई ,हाजी लाला से संपूर्ण चर्चा कर में व मेरे सहयोगी दौलत गोलानी जा पंहुँचे जिला कलेक्टर कार्यालय … हमने सर्व प्रथम जिले में काबिज अतिरिक्त कलेक्टर श्री बघेल जी से चर्चा कर पूरी बात बताई ,महोदय ने तत्काल इस केस हेतु मुख्य नगर पालिका प्रशासन को अवगत करा कर समुचित व्यवस्था हेतु बोला । हम नगर पालिका पँहुचे ,विषय वँहा पहले ही अवगत हो गया था सो बगैर देरी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री एल एस डोडिया के मार्गदर्शन में श्री कमलेश जायसवाल जी ने सारे दस्तावेज तैयार कर लेटर जिला स्थित वन स्टॉप सेंटर को भेजा। वन स्टॉप सेंटर में भटकी महिलाओं को ही रखने की व्यवस्था है ,पर सरस्वती की मानसिक स्थिति ठीक न होने से वँहा नही रख सकते ,साशन की गाइडलाइन है कि मानसिक विक्ष्पतो को नही रखा जाए। सो ऐसी स्थिति में साशन के पास अन्य जो विकल्प था वो उज्जेन स्थित सेवा धाम या इंदौर स्थित नारी निकेतन।।।
शासन का महकमा सरस्वती के पुनर्वास हेतु अपना प्रयास कर रहा था ,और हम सभी अपने स्तर से अपना प्रयास कर रहे थे।
जैसा कि इससे पूर्व में भारत के कई राज्यों से भटके मानसिक विक्ष्पतो के घर ढूंढ भेज पाने में करता आ रहा हूँ।
काउंसिल के दौरान बताये राज्य सम्बंधित जिले ,तहसील ,शहर,गांव के नामों को हैशटैग करके सम्बंधित की फोटो वीडियो व सम्पूर्ण जानकारी वाली पोस्ट को सोशल साइट्स पर वायरल करना ।
बस यही माध्यम हमें जल्द परिवार से सम्पर्क करने में मददगार बनता हैं और सरस्वती के केस में भी यही प्रयोग सिद्ध हुआ ।परिवार जन से सम्पर्क होते ही वीडियो कॉल से बात करा कर मिलान करते है व बिछड़े की उस स्थान पर होने की सूचना देते है। परिजन सम्पूर्ण दस्तावेज के साथ आकर बिछड़े को ले जाते है।
सरस्वती के गांव से उसके भाई काका व गांव के सरपंच भी आये थे , सारी कानूनी प्रक्रिया के पश्चात सरस्वती आपने परिवार के साथ बड़ी ही प्रसन्नता के साथ रवाना हुई …..
गुजरात के गांव पाडवेल तालुका फतेपुरा से आये परिजनों व ग्राम प्रधान ने सरस्वती का ख्याल रखने वाले व सकुशल घर वापसी कराने में सभी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोगियों के प्रति बड़ी कृतज्ञता से आभार व्यक्त किया ।
एक बात जो हमेशा मन मे आती है ….
क्यों हमारी संवेदनशीलता में कमी आ गई , सरस्वती करीब डेढ़ या दो माह से जिला मुख्यालय जैसे शहर में भटक कर बड़ी ही जिल्लत ,लाचारी ,बेबसी ,पीड़ादायी जिंदगी से गुजर बसर कर रही थी । और यह सारा शहर जंहा हजारों की संख्या में मानव जीवन गुजर बसर करता है जो रोजाना इस अबला को सिर्फ देखता है पर किसी मन मे यह सवाल नही आता कि यह भी एक मानव ही है , कोई जानना नही चाहता ये ऐसा जीवन क्यों जी रही है । कौन है कँहा से आई है कैसे आ गई है , इसके घर वापसी या पुनर्वास की व्यवस्था कैसे होगी , किसको इसकी सूचना देवें , जानना नही चाहता या फिर सिस्टम में बैठे करना नही चाहते । जिला मुख्यालय है स्वाभाविक कई ngo ,कई सामाजिक संगठन ,पूरा सरकारी तंत्र तथा निवासरत समूचा शहर… किसी की नजर नही पड़ी क्या ? खैर जो भी परिस्थिति रही हो ….
भला हो ,सेवा भावी कुछेक बन्धुओ की दृष्टि इस पर हुई ,सूचना मिली व सभी के अथक प्रयास रंग लाए ,बिछड़े को घर मिला ।
में तो यही कंहूँगा ,आप एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय देवें ,जैसा कि राठौर जी ,त्रिपाठी जी,सुराणा जी,गोलानी जी,सोनू जी व हाजी लाला जी ने दिया ।आपको प्रणाम है।
आपके आसपास यदि कंही इस तरह से कोई भटका, बेबस लाचार या मानसिक विक्षप्त दिखाई दे , आप हमें तुरन्त इसकी सूचना देवें ,हम हर सम्भव उसके पुनर्वास सहित सम्पूर्ण व्यवस्था हेतु उपलब्ध है ।
राजेंद्र श्रीवास्तव (नीरज)
मेघनगर जिला झाबुआ , सम्पर्क ,9425487518

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