विश्व शांति की राह में घृणा और हिंसा बड़ी बाधा: मोदी

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कोलंबो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि सतत विश्व शांति की राह में सबसे बड़ी चुनौती ऐसी मानसिकता है जिसकी जड़ों में घृणा और हिंसा बसी है, और यह अनिवार्य रूप से राष्ट्रों के बीच संघर्ष से उपजी हुई नहीं है।

 

कोलंबो में अंतरराष्ट्रीय वैसाख दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि वैसाख दिवस के लिए चुनी गयी सामाजिक न्याय और सतत विश्व शांति की थीम बुद्ध के उपदेशों से गहन मेल खाती है।

 

उन्होंने कहा, ‘‘सतत विश्व शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में अनिवार्य रूप से राष्ट्रों के बीच का संघर्ष नहीं है।’’ इस अवसर पर श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना, प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, राजनयिक, नेता और दुनिया भर से आये बौद्ध नेता मौजूद थे।

 

मोदी ने कहा, ‘‘यह ऐसी मानसिकता, विचारधारा, संस्थाओं और उपकरणों से है जिनकी जड़ों में घृणा और हिंसा के विचार भरे हुए हैं।’’ उन्होंने कहा, हमारे क्षेत्र में आतंकवाद का खतरा इन विध्वंसकारी भावनाओं की ठोस अभिव्यक्ति है।

 

उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज 21वीं सदी में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना वह ढाई सहस्राब्दि पहले था। प्रधानमंत्री ने कहा, हमारा क्षेत्र सौभाग्यशाली है कि उसने दुनिया को बुद्ध और उनके उपदेश जैसे अमूल्य उपहार दिये।

 

उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म और उसके विभिन्न पंथ ‘‘हमारे प्रशासन, संस्कृति और सिद्धांतों’’ में गहरी पैठ रखे हुए हैं। दो वर्षों में दूसरी बार श्रीलंका यात्रा पर गये मोदी की अगवानी श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने पारंपरिक उल्लास के बीच आयोजन स्थल पर की।

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